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Gita / Chapter 6.34
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद् दृढम् | तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्

Transliteration

cañcalaṃ hi manaḥ kṛṣṇa pramāthi balavad dṛḍham . tasyāhaṃ nigrahaṃ manye vāyoriva suduṣkaram

English

For, O Krsna, the mind is unsteady, turbulent, strong and obstinate. I consider its control to be as greatly difficult as of the wind.

Hindi

क्योंकि हे कृष्ण ! यह मन चंचल और प्रमथन स्वभाव का तथा बलवान् और दृढ़ है; उसका निग्रह करना मैं वायु के समान अति दुष्कर मानता हूँ ।।

Sanskrit
English
चञ्चलम्
restless
हि
verily
मनः
the mind
कृष्ण
O Krishna
प्रमाथि
turbulent
बलवत्
strong
दृढम्
unyielding
तस्य
of it
अहम्
I
निग्रहम्
control
मन्ये
think
वायोः
of the wind
इव
as
सुदुष्करम्
difficult to do.
Hindi

आधुनिक विचारधारा का मनुष्य सभी पवित्र शास्त्रों की केवल निन्दा करता है जबकि एक जिज्ञासु साधक भी प्रत्येक शास्त्रोक्त कथन को अन्धविश्वास से स्वीकार नहीं कर लेता वरन् वह प्रश्न भी पूछता है। परन्तु आधुनिक व्यक्ति की निन्दा और जिज्ञासु द्वारा किये गये प्रश्न में जमीन आसमान का अन्तर है। जिज्ञासु का प्रयत्न होता है कि शास्त्र के तात्पर्य को पूर्ण रूप से समझे। अर्जुन अपने मन को सम्यक् प्रकार से जानता है कि वह अति चंचल प्रमथनधर्मी बलवान् और दृढ़ है।प्रमाथि बलवान् और दृढ़ ये तीन शब्द अत्यन्त महत