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Gita / Chapter 6.43
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम् | यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन

Transliteration

tatra taṃ buddhisaṃyogaṃ labhate paurvadehikam . yatate ca tato bhūyaḥ saṃsiddhau kurunandana

English

There he becomes endowed with that wisdom acired in the previous body. and he strives more than before for perfection, O scion of the Kuru dynasty.

Hindi

हे कुरुनन्दन ! वह पुरुष वहाँ पूर्व देह में प्राप्त किये गये ज्ञान से सम्पन्न होकर योगसंसिद्धि के लिए उससे भी अधिक प्रयत्न करता है।।

Sanskrit
English
तत्र
there
तम्
that
बुद्धिसंयोगम्
union with knowledge
लभते
obtains
पौर्वदेहिकम्
acired in his fomer body
यतते
strives
च
and
ततः
than that
भूयः
more
संसिद्धौ
for perfection
कुरुनन्दन
O son of the Kurus.
Hindi

किसी को यह आशंका हो सकती है कि पुनर्जन्म लेने पर उस साधक को पुन प्रारम्भ से साधना का अभ्यास करना पड़ेगा। यह आशंका निर्मूल है। भगवान् कहते हैं कि योग के अनुकूल वातावरण में जन्म लेने के पश्चात् वह पुरुष पूर्व देह में अर्जित ज्ञान से सम्पन्न हो जाता है जिनके कारण अन्य लोगों की अपेक्षा वह अपनी शिक्षा अधिक सरलता से पूर्ण कर लेता है। कारण यह है कि उसके लिए यह कोई नवीन अध्ययन नहीं वरन् पूर्वार्जित ज्ञान की मात्र पुनरावृत्ति या सिंहावलोकन ही होता है। अल्पकाल में ही वह अपने हृदय में ही ज्ञान को