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Gita / Chapter 9.23
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

येऽप्यन्यदेवता भक्ता यजन्ते श्रद्धयान्विताः | तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूर्वकम्

Transliteration

ye.apyanyadevatābhaktā yajante śraddhayānvitāḥ . te.api māmeva kaunteya yajantyavidhipūrvakam

English

Even those who, being devoted to other deities and endowed with faith, worship (them), they also, O son of Kunti, worship Me alone (though) following the wrong method.

Hindi

हे कौन्तेय ! श्रद्धा से युक्त जो भक्त अन्य देवताओं को पूजते हैं, वे भी मुझे ही अविधिपूर्वक पूजते हैं।।

Sanskrit
English
ये
who
अपि
even
अन्यदेवताः
other gods
भक्ताः
devotees
यजन्ते
worship
श्रद्धया
with faith
अन्विताः
endowed
ते
they
अपि
also
माम्
Me
एव
alone
कौन्तेय
O Kaunteya
यजन्ति
worship
अविधिपूर्वकम्
by the wrong method.
Hindi

विश्व के सभी लोग एक ही पूजास्थल पर पूजा नहीं करते। न केवल शारीरिक दृष्टि से यह असम्भव है? वरन् मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी यह तर्कसंगत नहीं है? क्योंकि सब लोगों की अभिरुचियाँ भिन्नभिन्न होती हैं।भक्तगण जब भिन्नभिन्न देव स्थानों पर पूजा करते हैं? तब ये एक ही चेतन सत्य की आराधना करते हैं? जो इस परिवर्तनशील सृष्ट जगत् का अधिष्ठान है। जब वे विभिन्न देवताओं की पूजा करते हैं? तब भी वे उस एक सनातन सत्य का ही आह्वान करते हैं? जो उनके इष्ट देवता के रूप में व्यक्त हो रहा है। जब हम यह स्वीकार करते ह