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Gita / Chapter 9.24
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च | न तु मामभिजानन्ति तत्त्वेनातश्च्यवन्ति ते

Transliteration

ahaṃ hi sarvayajñānāṃ bhoktā ca prabhureva ca . na tu māmabhijānanti tattvenātaścyavanti te

English

I indeed am the enjoyer as also the Lord of all sacrifices; but they do not know Me in reality. Therefore they fall.

Hindi

क्योंकि सब यज्ञों का भोक्ता और स्वामी मैं ही हूँ, परन्तु वे मुझे तत्त्वत: नहीं जानते हैं, इसलिए वे गिरते हैं, अर्थात् संसार को प्राप्त होते हैं।।

Sanskrit
English
अहम्
I
हि
verily
सर्वयज्ञानाम्
of all sacrifices
भोक्ता
enjoyer
च
and
प्रभुः
Lord
एव
alone
च
and
न
not
तु
but
माम्
Me
अभिजानन्ति
know
तत्त्वेन
in essence (or in reality)
अतः
hence
च्यवन्ति
fall
ते
they.
Hindi

सभी यज्ञों का भोक्ता और स्वामी एक आत्मा ही है। आत्मा ही विभिन्न देवता शरीरों में व्यक्त हुआ है? जिसके कारण उन देवताओं को अपनीअपनी सार्मथ्य प्राप्त हुई है। उनका कृपाप्रसाद प्राप्त करने के लिए भक्तजन उनकी आराधना करते हैं। भगवान् यहाँ कहते हैं कि श्रद्धापूर्वक इन पूजकों द्वारा जिन देवताओं का यज्ञादि में आह्वान किया जाता है? उनका मूल अव्ययस्वरूप मैं ही हूँ। यह पूजा चाहे मन्दिर में हो या मस्जिद में? गिरजाघर में हो या गुरुद्वारे में। परन्तु क्योंकि वे मेरी परिच्छिन्न शक्तियों के अधिष्ठाता देव