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Gita / Chapter 9.28
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः | संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि

Transliteration

śubhāśubhaphalairevaṃ mokṣyase karmabandhanaiḥ . saṃnyāsayogayuktātmā vimukto māmupaiṣyasi

English

Thus, you will become free from bondage in the form of actions which are productive of good and bad results. Havng your mind inbued with the yoga of renunciation and becoming free, you will attain Me.

Hindi

इस प्रकार तुम शुभाशुभ फलस्वरूप कर्मबन्धनों से मुक्त हो जाओगे; और संन्यासयोग से युक्तचित्त हुए तुम विमुक्त होकर मुझे ही प्राप्त हो जाओगे।।

Sanskrit
English
शुभाशुभफलैः
from good and evil fruits
एवम्
thus
मोक्ष्यसे (thou)
shalt be freed
कर्मबन्धनैः
from the bonds of actions
संन्यासयोगयुक्तात्मा
with the mind steadfast in the Yoga of renunciation
विमुक्तः
liberated
माम्
to Me
उपैष्यसि (thou)
shalt come.
Hindi

यद्यपि आध्यात्मिक लक्ष्य एक ही होता हैं किन्तु उसकी प्राप्ति के साधनमार्ग अनेक हैं इन मार्गों का सतही अध्ययन करने पर वे परस्पर सर्वथा विपरीत दिखाई पड़ते हैं? तथापि उन सबका वैज्ञानिक आधार एक ही है? जो उन सबकी उपयोगिता एवं औचित्य को न्यायसंगत प्रमाणित करता है। गीता में अनेक स्थलों पर इस मूलभूत आधार को स्पष्टत दर्शाया गया है? तो किन्हीं अन्य स्थानों पर केवल उनका संकेत किया गया हैं फिर भी गीता के सावधान और सजग विद्यार्थी उसे पहचान सकते हैं। प्रस्तुत प्रकरण में इस पर विचार किया गया हैं कि कि