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Gita / Chapter 9.29
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः | ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्

Transliteration

samo.ahaṃ sarvabhūteṣu na me dveṣyo.asti na priyaḥ . ye bhajanti tu māṃ bhaktyā mayi te teṣu cāpyaham

English

I am impartial towards all beings; to Me there is none detastable or none dear. But those who worship Me with devotion, they exist in Me, and I too exist in them.

Hindi

मैं समस्त भूतों में सम हूँ; न कोई मुझे अप्रिय है और न प्रिय; परन्तु जो मुझे भक्तिपूर्वक भजते हैं, वे मुझमें और मैं भी उनमें हूँ।।

Sanskrit
English
समः
the same
अहम्
I
सर्वभूतेषु
in all beings
न
not
मे
to Me
द्वेष्यः
hateful
अस्ति
is
न
not
प्रियः
dear
ये
who
भजन्ति
worship
तु
but
माम्
Me
भक्त्या
with devotion
मयि
in Me
ते
they
तेषु
in them
च
and
अपि
also
अहम्
I.
Hindi

भूतमात्र में व्याप्त आत्मा एक ही है वही एक चैतन्य तत्त्व प्राणिमात्र के अन्तकरण की भावनाओं एवं विचारों को प्रकाशित करता है। मैं समस्त भूतों में सम हूँ। एक सूर्य जगत् की सभी वस्तुओं को प्रकाशित करता है और उसकी किरणें सभी वस्तुओं की सतहों पर से परावर्तित होती हैं चाहे वह सतह पाषाण की हो या किसी रत्न की।मुझे न कोई अप्रिय है और न कोई प्रिय यदि एक ही आत्मा? श्रीकृष्ण और बुद्ध में? आचार्य शंकर और ईसामसीह में? एक पागल और हत्यारे में तथा साधु और दुष्ट में रमती है तो क्या कारण है कि कोईकोई पुर